Monday, December 26, 2011

सिक्कों पर देवी-देवताओं का अंकन अति प्राचीन काल से ही देखा जा सकता है। प्राचीन काल के ग्रीक सिक्कों पर अपोलो, ज्यूस, एथेना आदि देवी-देवताओं का अंकन कर धार्मिक भावनाओं की अभिव्यक्ति की गई है। कुषाण कालीन सिक्कों पर हेलिआस मीरो, माओ आदि देवी-देवताओं को प्रदर्शित किया गया है।
गुप्त काल की मुद्राओं पर भी गुप्त काल के राजाओं को अभिवेदिकाओं में आहूति देते दिखाया गया है। इसी प्रकार मुस्लिम क्षेत्रों के प्राचीन सिक्कों पर कलमा व खलीफाओं के नाम लिखवाकर धार्मिक भावनाओं को अभिव्यक्त किया गया है।
इसी प्रकार राजस्थान के सीकर जिले में मिले प्राचीनतम पंचमार्क सिक्कों पर अंकित हिन्दू मान्यताओं के अनुसार त्रेतायुग में जन्मे भगवान श्रीराम, लक्ष्मण तथा भगवान शिव के अवतार हनुमान का पाया जाना हिन्दू धार्मिक भावनाओं की अभिव्यक्ति माना जा सकता है। ये पंचमार्क सिक्के प्रदेश के सीकर जिले के गुरारा में 11 जून 1998 को उत्खनन के दौरान एक कुलड़ी में मिले। इन्हें 9 मार्च 2000 को सरकार के पुरातत्व विभाग के द्वारा प्राप्त कर लिया गया।
इन 2744 सिक्कों में से 61 सिक्कों पर ‘थ्री मेन’ (तीन मानव आकृतियों) का अंकन है। इन मानव आकृतियों का सूक्ष्म अध्ययन करने के बाद मुद्राशास्त्रियों का मत है कि इन सिक्कों पर बायीं ओर से क्रमश: देवी सीता, श्रीराम और लक्ष्मण का अंकन हुआ है।
अंग्रेज विद्वान जान एलन ने अपने शोध पत्रों में ‘थ्री मेन’ व डा. परमेश्वरी लाल गुप्त ने ‘तीन मानव आकृति के रूप में देखे जाते हैं’ शीर्षक देते हुए इनकी चर्चा की है। किन्तु ये थ्री मेन नहीं हैं, बल्कि दो पुरुष और एक महिला है। प्रथम दो पुरुष आकृति में सिर पर केवल एक-एक जुड़ा बंधा है, जबकि तीसरी आकृति जो एक महिला की है, उसके सिर पर दो चोटियां या तीन जूड़े बंधे हुए हैं। इन सात प्रकार के सभी 61 सिक्कों पर तीसरी महिला आकृति का प्रत्येक सिक्के पर बायें हाथ की ओर ही अंकित पाया जाना रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित निम्नांकित श्लोक की पुष्टि करता है-

”दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे च जनकात्मजा
पुरतो मारूतिर्यस्य तं वन्दे रघुनन्दनम्।”

हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार परम्परागत रूप से एवं प्राचीन काल से ही दो पुरुषों के साथ बाएं हाथ की ओर खड़ी महिला के अंकन को देवी सीता के रूप में देखा या पहचाना जाता रहा है। जयपुर के मुद्रा विशेषज्ञ जफर उल्ला खां तथा दूसरे शोधकर्ताओं का कहना है कि सीकर जिले से प्राप्त उन्हीं 61 सिक्कों पर सूर्य का अंकन नहीं है जिन पर सूर्य के स्थान पर श्रीराम का अंकन है। क्योंकि भगवान राम स्वयं सूर्यवंशी थे इसलिए सूर्य का अंकन इन सिक्कों पर नहीं किया गया।
इनमें पंचम प्रकार के सिक्कों पर हनुमान जी का अंकन नमन मुद्रा में है और हनुमान जी के कंधो पर गदा का अंकन भी है।
प्राचीन सिक्कों पर भारतीय धार्मिक प्रतीकों के चिह्न से संबंधित विस्तृत शोध लेख भारतीय मुद्रा परिषद के 85 वें वार्षिक अधिवेशन में मुद्राशास्त्री जफर उल्ला खां द्वारा पढ़ा गया तो विश्व स्तर के सभी देशी-विदेशी मुद्राशास्त्रियों में हलचल मच गई। उनके तर्कों की जब कोई काट नहीं मिली तो मुद्रा विभाग की राष्ट्रीय (प्रामाणिक) पुस्तक में उनके इस अभिनव खोज को स्थान मिला। इन प्राचीनतम सिक्कों पर नए और सूक्ष्म ढंग से शोध करने वाले मुद्राशास्त्रियों का यह भी तर्क है कि जिस काल के ये सिक्के हैं उस समय लिपि का भी अविष्कार नहीं हुआ था।
मौर्यकाल में ब्राह्मी लिपि उन्नत अवस्था में पहुंची थी। उस समय तक के देश-विदेश में प्राप्त सभी सिक्कों पर कुछ न कुछ लिपिबद्ध किया गया है, किन्तु इन सिक्कों पर कहीं कुछ भी नहीं लिखा गया है। ये पंचमार्क सिक्के वृहत्तर भारत के विभिन्न स्थानों के उत्खनन के दौरान बहुत अधिक संख्या में मिलते रहते हैं, जो पारंपरिक भारतीय सांस्कृतिक मान्यताओं की पुष्टि करते हैं। साथ ही हिन्दू विश्वास को ऊर्जा देने का काम भी करते हैं।